*ओंकारेश्वर श्रीजी मंदिर ट्रस्ट की निविदाओं में भारी अनियमितताएं, ठेकेदारों में असमंजस का माहौल एक करोड़ 40 ल।ख रुपए का ठेका दिया ₹3 करोड़ 65 लाख रुपए मे*
– मुकेश शुक्ला आज तक 24 * 7 की विशेष रिपोर्ट, ओंकारेश्वर से
ओंकारेश्वर।
देश के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल पवित्र तीर्थ ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा विकास कार्यों के लिए जारी की गई निविदाओं में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। जूता स्टैंड के संचालन, सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति, एवं 11,000 वर्गफीट में फैले ऐतिहासिक जूना महल के समतलीकरण सहित विभिन्न कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गईं, किंतु इन निविदाओं में न तो टेंडर फॉर्म की कीमत, न ही ऑनेस्ट मनी डिपॉजिट, और न ही कोई स्पष्ट नियम व शर्तें निर्धारित की गईं।
इस पारदर्शिता के अभाव के चलते ठेकेदारों में भारी असमंजस का माहौल बन गया है। कई ठेकेदारों ने बिना किसी वित्तीय या विधिक उत्तरदायित्व के निविदाएं भर दीं, जिससे आगे चलकर अनुबंध और कार्य निष्पादन में अड़चनें आ सकती हैं।
पूर्व में भी रह चुका है विवाद
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी जूना महल के समतलीकरण हेतु निकाली गई एक निविदा विवादों में घिर चुकी है, जब एक ठेकेदार ने निविदा भरी, लेकिन बिना अनुबंध के कार्य छोड़ दिया गया। अब दोबारा बिना ठोस नियमों के निविदा आमंत्रण से भविष्य में उसी प्रकार की स्थिति दोहराए जाने की आशंका जताई जा रही है।
लोएस्ट टेंडर को दरकिनार कर महंगी निविदा को ठेका!
खंडवा निवासी दीपेश सुंगत ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उन्होंने 11,000 वर्गफीट क्षेत्र के समतलीकरण कार्य हेतु ₹1.40 करोड़ की न्यूनतम दर पर टेंडर प्रस्तुत किया था, लेकिन ट्रस्ट ने उसे दरकिनार कर ₹3.65 करोड़ की उच्चतम दर वाले ठेकेदार को कार्य सौंप दिया।
दीपेश का आरोप है कि, “जब मैंने कार्यपालक अधिकारी एसडीएम शिवम प्रजापति से इस विषय में बात की, तो उन्होंने कहा कि आप यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि आप कार्य किस प्रकार करेंगे। जबकि ₹3.65 करोड़ वाले ठेकेदार की कार्य योजना उन्हें संतोषजनक लगी।”
दीपेश ने इस निर्णय को “दान की राशि का दुरुपयोग” और “खुला भ्रष्टाचार” बताते हुए कलेक्टर को ज्ञापन देने व न्यायालय में याचिका दायर करने की बात कही है।
प्रशासन का पक्ष
इस विषय में ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट के कार्यपालक अधिकारी एसडीएम शिवम प्रजापति का कहना है कि, “ओंकार पर्वत दुर्गम क्षेत्र है, जहां 14 घंटे श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। इस कार्य में सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। दीपेश द्वारा कोई ठोस कार्य योजना प्रस्तुत नहीं की गई थी, अतः उनके टेंडर को स्वीकार नहीं किया गया।”
विशेषज्ञों की राय
वित्त एवं अनुबंध विशेषज्ञों का कहना है कि बिना स्पष्ट टेंडर शर्तों के इस प्रकार की प्रक्रिया न केवल भ्रष्टाचार को जन्म देती है, बल्कि यह न्यायिक विवादों, विकास कार्यों में देरी और विश्वसनीयता की हानि का कारण भी बन सकती है।
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निष्कर्ष:
ओंकारेश्वर जैसे धर्मनगरी स्थल पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है, ताकि दानदाताओं की आस्था बनी रहे और कार्य गुणवत्ता युक्त व समयबद्ध हो सके।
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