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गिरनार जी शिखर पर भगवान नेमिनाथ के निर्वाण लाडू के अधिकार को लेकर सिरोंज जैन मंदिर में अधिषेक,पूजासिरोंज से बडी संख्या में गिरनार जी शिखर पहुचें जैन श्रद्धालु

सिरोंज। गिरनार जी शिखर पर भगवान नेमिनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस पर निर्वाण लाडू व पूजन करने का अधिकार दिलाने की कामना को लेकर दिगम्बर जैन बडा मंदिर एंव पंचखनी जैन मंदिर में भगवान नेमिनाथ जी की शांतिधारा अभिषेक किया गया। तो वही मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से हजार की संख्या में जैन श्रद्धालुओं ने गिरनार पर्वत की चोटी पर पहुचकर मोक्ष के जयघोष के साथ भगवान नेमिनाथ प्रभु के मोक्ष कल्याणक पर भावपूर्ण वंदना की। इस मौके पर जैन श्रद्धालुओ ने कहा कि मोक्ष कल्याण की प्रणा वही से मिलती है। जहा प्रभु ने मोक्ष को प्राप्त किया। तो वही सिरोंज जैन मंदिर में निर्वाण लाडू चढाने की कामना को लेकर प्रमेन्द्र जैन द्वारा शांतिधारा अभिषेक सम्पन्न कराया गया। वही उन्होने कहा कि यह जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का निर्वाण दिवस है, जो गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर हुआ था।

जैन श्रद्धालुओं के लिए पवित्र तीर्थ स्थल – गिरनार जी शिखर पर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन भगवान नेमिनाथ के मोक्ष जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाता है। गिरनार पर्वत, जहाँ भगवान नेमिनाथ ने मोक्ष प्राप्त किया था। यह जैन श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है। भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस, जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ जी के मोक्ष प्राप्त करने का दिन है, जो जैनियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन, भक्त भगवान नेमिनाथ को याद करते हैं और उनके उपदेशों का पालन करने का संकल्प लेते हैं। गिरनार पर्वत से मोक्ष प्राप्त करने वाले भगवान नेमिनाथ का यह दिवस जैन धर्मावलंबियों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर दिल्ली से गिरनार तक 2000 किलोमीटर की 101 दिवसीय धर्म पदयात्रा 2 जुलाई को संपन्न हुई। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गिरनार पर्वत पर पूजा-अर्चना की।

संसार को छोडकर आत्मा में विलीन हुए थे भगवान नेमिनाथ – वहीं मुनि श्री ने कहा कि आज के ही दिन नेमिनाथ भगवान ने संपूर्ण संसार को छोड़कर आत्मा में विलीन हो गए थे। जिसे हम मोक्ष कहते हैं। प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के समय में लोगों को खाना, पीना, रहना कुछ भी नहीं आता था। उन्होंने चार पुरुषार्थ क्रिया, अर्थ, काम, मोक्ष के संबंध में बताया व मोक्ष पुरुषार्थ दिखाया। कमाना, उसका उपयोग कैसे करना यह भी आदिनाथ प्रभु ने बताया था। वही उन्होने कहा धर्म कैसे करना, क्या फल मिलेगा यह भी आदिनाथ प्रभु ने बताया था। चचेरे भाई ने षड्यंत्र रच कर जब नेमिनाथ की बारात जा रही थी तो मवेशियों व जानवरों को एक जगह पर बंधवा दिया था और उनकी चित्कार सुनकर नेमिनाथ ने अपना रथ रुकवाया और कारण पूछा तो उन्होंने उन सभी मवेशियों एवं पशुओं को बंधन से मुक्त कराया और मन में विचार आया कि में भी बंधन में बनने से मुक्त होऊ और उन्होंने मोक्ष का मार्ग चुना । धर्मपुरुषार्थ किया। गिरनार पर्वत पर दीक्षा ली। मोक्ष प्राप्त होने के बाद संसार में वापस नहीं आते हैं। बंधन मान लेते हैं जो कभी टूटता नहीं । आपने कहा कि अभिषेक के समय जिनेंद्र प्रभु की जय जयकार बोले ,ताली नहीं बजाए, ताली बजाने से जीव हिंसा होती है। राजनीतिक सभाओं में ताली बजती है ,धर्म सभा में ताली ना बजाए पाप का नाश होना बताते हुए धर्म मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होने कहा कि उपवास के दिन आरम, शारम ना करें । धर्म, ध्यान ,आराधना करें। त्याग तपस्या के दिन सोए नहीं उसे जीतने के लिए जागे। हम भी भगवान बनना चाहते हैं। आलोचना पाठ ,प्रतिक्रमण करें। नेमिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस आप सभी ने उत्साह पूर्वक मनाया। तीर्थंकर प्रवृत्ति का लक्ष्य रखकर भगवान बने। कल्याणक हर किसी का नहीं महापुरुषों और भगवान का मनाया जाता है। आज के समय में सगे भाई का भरोसा नहीं तो मौसेरे भाई सापेक्ष क्या करेंगे इस अवसर पर उन्होंने नेमिनाथ भगवान की जीवन शैली से शिक्षा दीक्षा लेने की बात कही। अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं।

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Author: aajtak24x7

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