श्रोताओं को संबोधित करते हुए सांसद ने राम कथा सुनकर उसका अनुकरण करने की बताई जरूरत
हसनपुर/अमरोहा क्षेत्र के ग्राम शेखुपुर झकड़ी में स्वामी रामप्रसाद उदासीन समाधि ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक महामंडलेश्वर स्वामी कपिल मुनि महाराज जी द्वारा आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं श्री राम कथा के पांचवे दिन अमरोहा लोकसभा सांसद चौ कंवर सिंह तंवर ने व्यास पीठ का पूजन कर कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने आश्रम के पूर्व महंत आनंद मुनि की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्प चढ़ा कर श्रद्धांजलि अर्पित की साथ ही श्रोताओं को संबोधित करते हुए सांसद जी ने राम कथा सुनकर उसका अनुकरण करने की जरूरत बताई तभी हमारे परिवारों की दशा सुधरेगी उनमें स्वर्ग का वातावरण निर्माण होगा।बनारस से आए कथा के व्यास पंडित छवि नाथ दुबे जी ने श्री राम बनगमन का आध्यात्मिक वर्णन करते हुए कहा कि सच्चा भाई संपत्ति का बंटवारा नहीं करता बल्कि भाई की विपत्ति का बंटवारा करता है। श्री राम बन जाने को तैयार हुए तो उनके साथ चलने के लिए लक्ष्मण भी तैयार हो गए। श्री राम ने लक्ष्मण को समझाते हुए कहा कि लक्ष्मण तुम अयोध्या की देखभाल करो तो लक्ष्मण बोले मेरे लिए जहां राम हैं वहीं अयोध्या है । लक्ष्मण ने अयोध्या के सभी भौतिक साधनों और उर्मिला जैसी नारी को छोड़कर बन में जाकर श्री राम जी की सेवा करने का निर्णय लिया। श्री राम ने पुनः लक्ष्मण जी से कहा लक्ष्मण अयोध्या में रहकर माता पिता की सेवा करो इस पर लक्ष्मण ने जवाब दिया कि मैं बाल्यकाल से आपके साथ रहा जब कष्ट का समय आया तो आपको अकेला कैसे छोड़ दूं। भाई संपत्ति का नहीं विपत्ति का बंटवारा करता है। बड़ा भाई पिता तुल्य होता है और भाभी का स्थान माता के सामान है सच्ची सेवा तो बन जाने के बाद ही मिलेगी। उर्मिला अयोध्या में रहकर माता पिता की सेवा करने का पुण्य कार्य करेंगी। रामायण के इस प्रसंग से परिवार को जोड़ने की प्रेरणा मिलती है। कथावाचक श्री दूबे जी ने आगे कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन से और रामायण की शिक्षाओं को व्यवहार में उतार कर जीवन को स्वर्ग बनाया जा सकता है। इस अवसर पर राष्ट्र सेवी संगठन संयोजक कृष्ण कुमार शर्मा, भाजपा नेता सतीश अग्रवाल, महेश खड़गवंशी, मनोज शर्मा, सुधीर चौहान, आलोक चौहान,आश्रम परिवार से महंत श्री राजेंद्र मुनि, केशव मुनि, महिपाल मुनि, प्रवेश मुनि, राम सागर मुनि, स्वामी प्रभा मुनि, छवि मुनि, प्रभा मुनि द्वितीय, कृष्ण मुनि, ब्रह्मचारी मुनि, कमलेश मुनि, उमेश चंद्र, रक्षपाल सिंह , हरसरन सिंह आदि भारी संख्या में भक्त गण मौजूद रहे।



