हज़रत इमाम हुसैन की याद में महाराज बाड़े पर मनाई गई कत्ल की रात कोतवाली थाना प्रभारी को किया सम्मानित

अतुल मल्होत्रा रिपोर्ट


वरिष्ठ समाज सेवी सादिक खान मेव शानू ने किया ताजियेदारों, अखाड़ेबाजों के साथ साथ पुलिस अधिकारियों का इस्तकवाल
ग्वालियर। हज़रत इमाम हुसैन की याद में महाराज बाड़े पर कत्ल की रात मनाई गई, इस्लाम धर्म के अनुसान यह दिन हज़रत इमाम हुसैन की शहादत का दिन होता है इस दिन को बड़े एहतराम और अदव के साथ मनाया जाता है, हज़रत इमाम हुसैन की याद में शहरभर में कई प्रमुख स्थानों पर ताज़िये रखे जाते है जो मुहरर्रम की 9 तारीख यानी कत्ल की रात को महाराज बाडे पर परंपराअनुसार गश्त के लिये निकले जिनके इस्तकवाल के लिये हाजी सईद सिंधिया के दामाद वरिष्ठ समाजसेवी व वरिष्ठ भाजपा युवा नेता सादिक खान मेव शानू भाई ने महाराज बाड़े पर एक विशेष मंच महाराज बाड़े पर बनाया जहां शहर के लगभग 150 से ज्यादा ताजियेदारों और अखाड़े बाजों के उस्तादों का इस्तकबाल किया गया, यह सिलसिला रात 11 बजे से शुरू हुआ और सुवह चार बजे तक चला इस्से पहले सादिक खान मेव ने महाराज बाड़े से निकल रही जगन्नाथ रथ यात्रा को पानी पिलाने का काम किया। इस्लाम धर्म में पानी पिलाना और लगंर बांटना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य माना जाता है। महाराज बाड़े पर शहर के कई प्रमुख ताज़िये और अखाड़े गश्त के लिये आए और सभी ताजियेदारों और अखाड़ों के उस्ताद को साफा, शील्ड, शाॅल, और बतौर नजराना देकर उनका इस्तकबाल किया वहीं मंच से लंगर भी तक्सीम किया गया वहीं इस दौरान सादिक खान मेव शानू ने पुलिस प्रशाशन का भी उनकी बेहतर व्यवस्थाओं के लिए शुक्रिया अदा किया और मंच पर सीएसपी मनीष यादव और कोतवाली थाना प्रभारी मोहिनी वर्मा को सम्मानित किया, वही मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के ज़िला अध्यक्ष पत्रकार शाहनवाज खान को भी लाइव कवरेज दिखाने के लिए मोमेंटो देकर व साफा पहनाकर सम्मानित किया। शहर में पहली बार इस तरीके का भव्य मंच बना जहां मुस्लिम समाज के प्रमुख चेहरे एक ही मंच पर नज़र आए जिनमे आइम्मा काउंसिल के अध्यक्ष हाफिज इस्माईल चिश्ति, अफज़ल बेग, जेनुल आवेदीन, जमील बेग, नाज़िम खान, पत्रकार शाहनवाज खान, साबू खान, रहीश कुरैशी, शाहरूख खान, रईस खान, जफर खान, ईशान खान, आदी शामिल रहे। मंच से कई समाजसेवियों को भी सम्मानित किया गया जिनमें मुख्य रूप से बादशाह खान, सईद खान व अन्य लोग रहे।
वहीं दूसरे दिन जिसे इस्लाम के मुताबिक योमे आशुरा कहते हैं यह दो दिन यानी 9 और 10 बहुत एहम माने जाते हैं विशेष तोर पर इन दोनो दिन रोजे भी रखे जाते हैं। दसवे दिन सागरताल करवला में शहर के सभी ताज़िये दफनाए और ठंडे किये गए, इस पूरे दिन जगह जगह हर गली मोहल्ले और चैराहों पर लंगर की छवीलें लगाई गई और देर शाम रोज़ा खोला गया और मुल्क के लिये दुआ की गई।

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Author: aajtak24x7

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