


मुकेश शुक्ला आज तक 24 * 7
ओंकारेश्वर तीर्थ नगरी के निकट ग्राम शिव कोठी परम शक्ति पीठ के तत्वाधान में दीदी मां का महोत्सव श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर दीदी मां ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए अत्यंत प्रभावी उद्बोधन दिया। दीदी मां ने कहा कि किसी साधक को सतगुरु का मिलना अत्यंत सौभाग्य की बात है। गुरु अनुशासन की छेनी से शिष्य को गढ़ता है। दीदी मां ने कहा कि जब रचनात्मक विचार व्यवहार में बदलते हैं तो परिवर्तन आता है। हमें प्रत्येक भारतवासी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए समर्पण एवं निष्ठा के साथ प्रयास करना होंगे। दीदी मां ने भक्तों के समक्ष अपने गुरु परमानंद जी महाराज की कृपा और रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़े संस्मरण साझा किए। दीदी मां ने बताया कि उन्होंने 16 वर्ष की आयु में बिना किसी को बताए घर छोड़ा था। मन में वैराग्य का भाव लिए मैं बस में बैठ गई और रुड़की होते हुए हरिद्वार पहुंची।तत्पश्चात अमृतसर के एक आश्रम में सत्संग के दौरान मुझे अपने महान गुरु का साक्षात्कार हुआ। आश्रम में अनेक दैदीप्यमान महापुरुष मौजूद थे। उनके बीच मेरे गुरुदेव बैठे थे। मैंने देखते ही गुरुदेव के चरणों में माथा टेका और फिर उनके चरणों से मेरा माथा नहीं उठा। गुरुदेव ने मेरे माथे को स्पर्श किया और मैं भावसमाधि के ध्यान की गहराइयों में उतर गई। गुरुदेव ने मुझे संन्यास की दीक्षा दी और ऋतंभरा नाम दिया। गुरुदेव के रूप में ईश्वर मुझे मिले। दीदी मां ने कहा कि बालिकाएं उच्छृंखल नहीं बनें। रील बनाकर अपने चरित्र का पतन नहीं करें और इजरायल की वीर नारियों की तरह वीरबाला बनें। दीदी मां की ओजस्वी वाणी सुनकर नौजवान जागे और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। महोत्सव के प्रारंभ में परमशक्ति पीठ की नन्हीं बालिकाओं ने राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।परमशक्ति पीठ की संचालिका साध्वी साक्षी चेतना दीदी,विधायक राजकुमार मेव, भाजपा जिलाध्यक्ष नंदा ब्राह्मणे, विधायक कंचन तन्वे, विधायक सचिन बिरला,विधायक नारायण पटेल,अनद केनाडकर, डायल 100 के नाम से विख्यात संटू दादा पुनासा सहित बड़ी संख्या में आसपास एवं दूरस्थ प्रदेशों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

