जीएसटी सुधार पर कैट की बैठक, कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।

अतुल मल्होत्रा ब्यूरो रिपोर्ट।

ग्वालियर। काॅन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आज 19 अगस्त काे जीवाजी क्लब में प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के दीपावली तक किये जा रहे जीएसटी रिफॉर्म पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्वालियर के प्रमुख चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने भाग लिया और कई महत्वपूर्ण सुझाव तैयार किए।

बैठक में यह सुझाव सामने आए—

रोज़मर्रा की ज़रूरत की वस्तुएं जैसे खाने-पीने का सामान, कपड़े-जूते, दवाइयाँ, बिस्कुट, नमकीन आदि, जो वर्तमान में 12% और 18% स्लैब में आती हैं, उन्हें या तो टैक्स-फ्री श्रेणी में या अधिकतम 5% की श्रेणी में रखा जाए।

दरों में कटौती के बाद एंटी-प्रॉफिटियरिंग लागू होना चाहिए ताकि उपभोक्ता को वास्तविक लाभ मिले। साथ ही स्पष्ट गाइडलाइन्स बनाई जाएँ जिससे व्यापारियों पर बाद में अनावश्यक कार्रवाई न हो।

टैक्स दरों में बदलाव के दौरान डिमांड व बिजनेस साइकिल प्रभावित न हों और स्टॉक होर्डिंग जैसी स्थिति न बने, इसके लिए एक उपयुक्त मैकेनिज्म तैयार किया जाए।

जीएसटी ऑडिट और स्क्रूटनी 4-5 साल एक साथ करने की बजाय वार्षिक आधार पर होनी चाहिए, ताकि छोटी-सी गलती पर व्यापारियों को कई साल का ब्याज न चुकाना पड़े।

समान वस्तुओं की डुप्लीकेसी रोकने के लिए प्रावधान हों जिससे टैक्स नेट बढ़े और दर कम करने से भी लंबी अवधि में टैक्स बेस मज़बूत हो।

मेडिकल व शैक्षणिक सेवाओं से जुड़ी आवश्यक एंसीलरी सर्विसेज तथा हेल्थ इंश्योरेंस जैसी अनिवार्य सेवाओं पर भी न्यूनतम टैक्स लगाया जाए।

लग्ज़री सेक्टर (कार, एसी आदि) की दरों का निर्धारण संपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और पेट्रोल-डीज़ल खपत को देखते हुए होना चाहिए। वहीं, ईवी और ग्रीन एनर्जी को और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

इनवर्टेड ड्यूटी की समस्या दर-संतुलन के कारण सामने आती है, ऐसे में इनवर्टेड ड्यूटी का रिफंड आसान होना चाहिए और जिन सेक्टरों में रिफंड ब्लॉक है, उन्हें भी अनुमति दी जानी चाहिए ताकि अनावश्यक इनपुट क्रेडिट का जमावड़ा न हो।

जीएसटी में वर्तमान में लागू मल्टीपल टैक्स स्लैब्स को घटाकर न्यूनतम दो स्लैब रखे जाएँ। साथ ही, अतिरिक्त सेस (Cess) को पूरी तरह समाप्त किया जाए, ताकि टैक्स संरचना सरल और पारदर्शी बने

ई-इनवॉइसिंग की कैंसिलेशन टाइमलाइन बढ़ाई जाए और अनजाने में हुई गलतियों पर उच्चतम दंड लगाने की बजाय वाजिब पेनल्टी का प्रावधान हो।

बैठक में सीए मयूर गर्ग संयोजक , श्री हर्ष सेठ सहसंयोजक , सीए शाकुंत सोमानी, सीए निशांत जुनेजा, सीए गगन जैन ,सीए विवेक जैन और सीए निखिल मालपानी उपस्थित रहे |

बैठक में यह मत सर्वसम्मति से उभरकर आया कि जीएसटी को और सरल, न्यायसंगत तथा व्यापार और उपभोक्ता—दोनों के अनुकूल बनाया जाए। तैयार किए गए सुझाव कैट की राष्ट्रीय कार्यसमिति के माध्यम से केंद्र सरकार तक भेजे जाएंगे।

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Author: aajtak24x7

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