आईजा ने किया पूर्व केन्द्रीय मंत्री व पूर्व आईएएस का सम्मान

आईजा ने किया पूर्व केन्द्रीय मंत्री व पूर्व आईएएस का सम्मा

पूर्व केन्द्रीय मंत्री असलम शेर खान बोले – राष्ट्रीय संत मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आर्शीवाद से रह गया वंचित, शीघ्र करूंगा कोशिश पुनः मिले दर्शन लाभ

सिरोंज। ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोशिएसन आईजा द्वारा भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय मंत्री असलम शेर खान व पूर्व आईएएस सभाजीत यादव का सम्मान आईजा के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट राजीव जैन सैनानी द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि संस्कार ग्रीन वैली स्कूल में एक भव्य कार्यक्रम में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष श्री सैनानी ने बताया कि 5 अक्टूबर 2025 को अशोकनगर में राष्ट्रीय संत गुरूवर मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज की उपस्थित में जैन पत्रकारो के महाकुंभ का आयोजन किया गया था। उक्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय मंत्री असलम शेर खान व पूर्व आईएएस सभाजीत यादव आमत्रिंत थें। लेकिन निजी व्यवस्ताओं के कारण वह कार्यक्रम में शामिल नही हो पाए थें। इस कारण उनका सम्मान सिरोंज में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम तहसीलदार संजय चौरसिया,संस्कार ग्रीन वैली स्कूल के चेयरमैन निजाम खान,ब्लॉक शिक्षा अधिकारी उमेश सोनी,वरिष्ठ समाजसेवी जफर खान,पत्रकार नसीम खान,सलमान खान,अरवाज खान शेखू,जावेद खान,कमलेश कुशवाह आदि मौजूद रहें।

राष्ट्रीय संत मुनि श्री के आर्शीवाद से रह गया वंचित – इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री असलम शेर खान ने कहा कि अशोकनगर में आयोजित जैन पत्रकारो के महा सम्मेलन में अपनी निजी व्यस्ताओं के कारण शामिल नही हो पाया। जिसका मुझे अफशोस है और मुझे दुख इस बात का है कि में राष्ट्रीय संत गुरूवर मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के आर्शीवाद से वंचित रह गया। में शीघ्र ही कोशिश करूंगा कि ऐसे राष्ट्रीय संत का पुनः मुझे दर्शन लाभ मिले और में उनका आर्शीवाद प्राप्त करो। वही उन्होने मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के बारे में कहा कि मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज एक प्रसिद्ध जैन संत हैं और वह दिगंबर जैन परंपरा के एक प्रमुख आचार्य हैं। उनके प्रवचन बहुत गहरे माने जाते हैं और वे जैन दर्शन के सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाते हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ते हैं। उन्होंने समाज में धार्मिक जागरूकता फैलाने, सात्विक जीवन जीने और जैन धर्म के मूल्यों का पालन करने के लिए कई लोगों को प्रेरित किया है। वे एक मुनि के रूप में कठोर तपस्या और त्याग का जीवन जीते हैं, जो उनके अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। साथ ही उन्होने जैन धर्म से संबंधित कई ग्रंथों और साहित्य की रचना की है, जो जैन समुदाय के बीच पूजनीय हैं।

जैन धर्म के प्रमुख गुरू संत सुधा सागर महाराज – वही पूर्व आईएएस सभाजीत यादव ने कहा कि मुनि श्री सुधासागर महाराज एक दिगंबर साधु हैं और अब जैन धर्म के प्रमुख गुरु हैं। वह संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जैन संघ का हिस्सा थे। सुधासागर जी एक ज्ञानी जैन संत हैं और वह एक गुरु के रूप में, जैन मंदिरों, जैनियों और समाज के कल्याण के लिए काम करते हैं। वह कई जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए प्रेरणा हैं जो बुरी स्थिति में थे, जैसे सांगानेर और दादाबाड़ी कोटा में स्थित सांघीजी। वह नारेली जैन मंदिर के पीछे भी प्रेरणा थे। मुनि श्री सुधासागर जी महाराजने मध्य प्रदेश के बजरंगगढ़ में स्थित तीर्थंकर शांतिनाथ के एक प्राचीन जैन मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए पहल की। 2016 में उनकी उपस्थिति में राजस्थान के बांसवाड़ा में जैन मंदिर की आधारशिला रखी गई। मुनि श्री सुधासागर महाराज की प्रवचन शैली जैन धर्म के सभी को लाभकारी होती है। उनके मार्गदर्शन में बहुत से ग्रंथों का प्रकाशन हुआ है। वही आईजा के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट राजीव जैन सैनानी ने कहा कि मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज एक प्रसिद्ध दिगंबर जैन साधु हैं, जिनका जन्म 29 अगस्त 1958 को मध्य प्रदेश के ईशूरवाड़ा में हुआ था। उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से क्षुल्लक, ऐलक और अंततः मुनि दीक्षा प्राप्त की और तब से वे जैन धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कई जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार में प्रेरणा दी और जैन संस्कृति संस्थान जैसी संस्थाओं की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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Author: aajtak24x7

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