शाजापुर जिले के
“कालापीपल में आंगनबाड़ी व्यवस्था फेल! CDPO कार्यालय बना दिखावा, केंद्रों में न बच्चे, न सुविधा”
कालापीपल से इस वक्त एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ रही है, जहां महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला परियोजना अधिकारी का कार्यालय महज नाम का रह गया है और इसका सीधा असर आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिखाई दे रहा है।
कालापीपल में महिला बाल विकास विभाग की स्थिति बद से बदतर होती नजर आ रही है। महिला परियोजना अधिकारी ललित राठौर का कार्यालय अक्सर बंद या खाली मिलता है। कर्मचारियों का एक ही जवाब— “साहब फील्ड में हैं”। जबकि विभागीय समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तय है।
कार्यालय निरीक्षण के दौरान न तो कार्यभार पर्यवेक्षक मौजूद मिले और न ही पर्यवेक्षक सरिता बागड़े। किराए के भवन में संचालित यह कार्यालय खुद ही अव्यवस्था का शिकार नजर आया।
जब हमारी टीम आंगनबाड़ी केंद्रों की हकीकत जानने गांवों में पहुंची, तो हालात और भी चिंताजनक मिले। ग्राम लसूडिया मलक की आंगनबाड़ी में एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। बैठने की व्यवस्था नहीं, फर्श की टाइल्स टूटी हुईं, शौचालय और मूत्रालय बदहाल और चारों ओर गंदगी का अंबार।
यही स्थिति ग्राम रोसला की आंगनबाड़ी में भी देखने को मिली, जहां केंद्र पूरी तरह खाली था और अव्यवस्था चरम पर थी। सवाल उठता है कि जब परियोजना कार्यालय ही लापरवाही का शिकार है, तो आंगनबाड़ियों से बेहतर संचालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
(स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया):
“जब अधिकारी ही समय पर नहीं आते, तो बच्चों और महिलाओं की सुध कौन लेगा?”
सरकारी नियमों और योजनाओं के नाम पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में न बच्चे हैं, न सुविधाएं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस लापरवाही पर कब कार्रवाई करता है।
आज तक 24 * 7 जिला चीफ ब्यूरो विश्वास चंद्रवंशी की रिपोर्ट



