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सरकार ने ग्रामीण गरीबों के रोजगार के कानूनी अधिकार को छीना —

आज तक 24 X7 टीवी न्यूज चैनल से जिला सीतापुर से जिला संवाददाता अरविन्द कुमार

 

 

 

सरकार ने ग्रामीण गरीबों के रोजगार के कानूनी अधिकार को छीना –

सुनीला रावत जीरामजी योजना पलायन और आजीविका के संकट को और बढ़ाएगा बृजबिहारी मनरेगा बहाल करो — शिव प्रकाश सिंह सीतापुर 17 दिसंबर 2025, मनरेगा की जगह मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल, 2025 (जीरामजी) योजना गांव के गरीबों और मजदूरों को मिलने वाले रोजगार के कानूनी अधिकार को छीनने की कार्रवाई है। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट देश के तमाम समूहों, संगठनों और दलों के साथ मिलकर ग्रामीण गरीबों पर किए इस हमले का चौरफा विरोध करेगा , यह बात आज सुनीला रावत ने जनपद की ग्राम सभाओ मे ग्रामीणो द्वारा मनरेगा बहाली की मांगो को लेकर जारी प्रतिवाद दिवस

पर कही , आज सीतापुर जनपद के सभी ब्लाको की 340 ग्राम सभाओ मे पहले चरण मे ” प्रतिवाद दिवस ” आयोजित किया , गांवो मे यह ” प्रतिवाद दिवस ” 21 दिसम्बर तक लगातार जारी रहेगा । दूसरे चरण मे 22 से 27 दिसम्बर तक ब्लाक मुख्यालयो पर मनरेगा मजदूर प्रतिवाद कर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन सौंपेगे । ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य बृजबिहारी ने कहा कि ” मनरेगा ” की जगह लाई गई ” जीरामजी योजना ” गांव में हो रहे पलायन व बेरोजगारी को बढ़ाने का काम करेगी। जिससे ग्रामीण गरीबों की क्रयशक्ति और कमजोर होगी और उन्हें आजीविका के संकट को झेलना पड़ेगा। जो देश में पहले से ही जारी मंदी को और भी बढ़ाने का काम करेगी। किसान मंच के राष्ट्रीय सचिव शिव प्रकाश सिंह ने मनरेगा को बहाल करने की मांग की और कहा ऐसा न होने पर जन आंदोलन तेज किया जायेगा । आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की राष्ट्रीय कार्य समिति ने कहा कि मनरेगा में जहां सभी ग्रामीण गरीबों को जॉब कार्ड मिलता था और सरकार की यह जवाबदेही थी कि काम मांगने के 14 दिनों के अंदर सरकार मजदूरों को काम देना सुनिश्चित करें और काम ना दे पाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता दे। साथ ही यदि मजदूरी बकाया रह जाती है तो ब्याज सहित उसका भुगतान करें। यह सारे प्रावधान नई जीरामजी योजना में नहीं है। योजना में मजदूरों को काम ना मिलने की दशा में बेकारी भत्ता मिलने के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है और मजदूरी की दर भी निश्चित नहीं की गई है। जबकि मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी सीधे तौर पर केंद्र सरकार द्वारा मजदूरों के खाते में भेजी जाती थी। बयान में कहा गया कि मनरेगा में जहां केंद्र सरकार 90 प्रतिशत धनराशि देती थी और 10 प्रतिशत ही राज्य सरकार को देना पड़ता था। वही इस कानून में 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य को देने का बात की गई है। जो कि पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए दे पाना मुश्किल होगा। इस योजना में वर्ष में 60 दिन जो कृषि कार्य के दिन होगें उनमें इस योजना को चलाने पर रोक लगा दी गई है। सभी लोग जानते हैं कि कृषि कार्य के आधुनिकीकरण और मशीनीकरण के कारण पहले ही खेत मजदूर को कृषि में काम नहीं मिल रहा था और उन्हें बड़ी संख्या में पलायन करना पड़ता है। ऐसे में यह कार्यवाही मजदूरों पर एक बड़ा कुठाराघात है। मनरेगा में जहां जॉब कार्ड, मस्टर रोल, सोशल ऑडिट, सब लिखित और सार्वजनिक है। वहीं इस योजना में ऐसा कुछ भी नही है। बयान में कहा गया कि मनरेगा योजना लागू होने के समय से ही देश के बड़े पूंजी घराने हैं वह इसका विरोध करते रहें है। सत्ता प्राप्त करने के बाद ही मोदी सरकार मनरेगा के प्रति कभी भी सहज नहीं रही है। कोविड काल जिसमें मनरेगा ने लोगों को भुखमरी की हालत से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी, उस अवधि को छोड़ दिया जाए तो लगातार सरकार मनरेगा के बजट फंड में कटौती करती रही है और अब उसने सीधे तौर पर इसे बंद करने का निर्णय लिया है। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने सरकार से मांग की है कि पहले से ही संकटग्रस्त ग्रामीण इलाकों में मनरेगा को खत्म करने की कोशिश को बंद करें, मनरेगा में कार्यदिवस, मजदूरी दर और बजट बढ़ाए और ग्रामीण स्तर पर रोजगार को सुनिश्चित करने का काम करें।

 

सुनीला रावत

. सीतापुर , जिला कार्यालय

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Author: aajtak24x7