लोकेशन खाचरोद
रिपोर्टर विरम देव
*मासूम बच्चों पर अफसरशाही का कहर खाचरोद में SDM–BRC की कथित हिटलरशाही, छात्रों और पत्रकारों से अभद्रत*
उज्जैन। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन की खाचरोद तहसील में अफसरशाही का एक चौंकाने वाला और शर्मनाक चेहरा सामने आया है। ग्राम बटलावादी में स्कूल के पास ग्राम पंचायत भवन निर्माण को लेकर विरोध कर रहे मासूम स्कूली बच्चों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कथित रूप से अभद्रता और धमकी दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
निर्माण कार्य रोकने की मांग को लेकर स्कूली बच्चे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे थे। बच्चे अपनी समस्या शांतिपूर्वक बताने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आरोप है कि एसडीएम नेहा साहू ज्ञापन लेकर बिना सुने ही अंदर चली गईं और बाहर खड़े बच्चों से गुस्से और धमकी भरे लहजे में बात की। बच्चों का कहना है कि उन्हें वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई, जिससे वे डर गए और रोने-चिल्लाने लगे।
मामले में बीआरसी अधिकारी पुष्पराज तिवारी पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। बच्चों ने बताया कि बीआरसी अधिकारी ने उन्हें नाम काटने और फेल करने की धमकी दी। जब बच्चों ने अख़बारों में प्रकाशित खबरों की बात कही तो बीआरसी अधिकारी ने मीडिया और छात्रों के सामने कहा—
“क्या होता है अख़बार?”
इस बयान ने न केवल छात्रों बल्कि पत्रकारों को भी आक्रोशित कर दिया।
स्थिति उस समय और विस्फोटक हो गई जब पत्रकारों ने एसडीएम से सवाल किए। आरोप है कि एसडीएम नेहा साहू ने पत्रकारों से भी बदसलूकी भरे लहजे में बात की और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी। इस व्यवहार को प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया जा रहा है।
घटना के बाद स्कूली बच्चों, एबीवीपी कार्यकर्ताओं और पत्रकारों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सभी ने आरोप लगाया कि मासूम बच्चों और मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे “हिटलरशाही रवैये” वाले अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
अब यह देखना होगा कि प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है, या फिर मासूम बच्चों की आवाज़ को भी अफसरशाही के दबाव में दबा दिया जाएगा।
रिपोर्टर विरम देव



