लोकेशन/ सोनभद्र उत्तर प्रदेश
रिपोर्ट/ कन्हैयालाल केशरी
*ओबरा मछली मंडी में सड़ी-गली व प्रतिबंधित मछलियों की बिक्री का आरोप, उपभोक्ता की बिगड़ी तबीयत
ओबरा (सोनभद्र)। ओबरा थाना क्षेत्र स्थित ओबरा मार्केट की मछली मंडी एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों ने मंडी में प्रतिबंधित मांगुर मछली के साथ-साथ कई दिनों पुरानी एवं खराब हो चुकी मछलियों की खुलेआम बिक्री किए जाने का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि बर्फ की आड़ में सड़ी-गली मछलियों को ताजा बताकर बेचा जा रहा है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब एक उपभोक्ता ने मछली खाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने का आरोप लगाया। पीड़ित के अनुसार दिनांक 31 मई 2026, रविवार की रात लगभग 9 बजे उसने ओबरा मछली मंडी स्थित मछली विक्रेता सूरज सोनकर की दुकान से मछली खरीदी थी। मछली को दूसरी दुकान पर साफ करवाने के बाद फ्राई कर खाया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत खराब होने लगी।
पीड़ित ने बताया कि मछली का स्वाद और गुणवत्ता संदिग्ध लग रही थी तथा घर पहुंचने से पहले ही उसे चार से पांच बार उल्टी हुई। हालत बिगड़ने पर उसने रात में ही दवा लेकर उपचार कराया, जिसके बाद कुछ राहत मिली। उपभोक्ता का कहना है कि यदि समय रहते इलाज नहीं मिलता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
घटना के बाद मंडी में बिक रही मछलियों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मत्स्य विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता के कारण मछली विक्रेता नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और आम लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ओबरा मछली मंडी में विशेष जांच अभियान चलाया जाए तथा प्रतिबंधित मांगुर और खराब मछलियों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही दोषी विक्रेताओं एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश शासन, मत्स्य विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनता की जान से खिलवाड़ माना जाएगा।



