100 वर्षों से अटूट आस्था का महाअनुष्ठान: पुरुषोत्तम माह में सवा लाख शिवलिंगों का निर्माण, सैनिक परिवारों की खुशहाली के लिए भी होती है विशेष प्रार्थना

100 वर्षों से अटूट आस्था का महाअनुष्ठान: पुरुषोत्तम माह में सवा लाख शिवलिंगों का निर्माण, सैनिक परिवारों की खुशहाली के लिए भी होती है विशेष प्रार्थन

 

त्यौंथर विशेष,

 

पुरुषोत्तम माह के पावन अवसर पर त्यौंथर क्षेत्र का अंजोरा गांव इन दिनों भक्ति, आस्था और राष्ट्रभक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बन रहा है। यहां ग्रामीणों द्वारा सामूहिक रूप से सवा लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर है। सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है और शिवभक्ति की गूंज पूरे गांव में सुनाई देती है।

ग्रामीणों के अनुसार यह धार्मिक परंपरा 100 वर्षों से भी अधिक समय से निरंतर चली आ रही है। पीढ़ी दर पीढ़ी इस अनुष्ठान को गांव के लोग पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ निभाते आ रहे हैं। पुरुषोत्तम माह को सनातन धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है और इस माह में भगवान शिव की आराधना को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसी मान्यता के अनुरूप ग्रामीण मिट्टी से पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर उनका विधिवत पूजन-अर्चन करते हैं।

अंजोरा गांव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे मिलकर शिवलिंग निर्माण में सहभागिता निभाते हैं। इसके बाद सामूहिक रूप से रुद्राभिषेक, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस अनुष्ठान से गांव में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा भगवान भोलेनाथ की कृपा से समस्त कष्टों का निवारण होता है।

इस धार्मिक आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल गांव और क्षेत्र की खुशहाली के लिए ही नहीं, बल्कि देश की रक्षा में जुटे सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए भी विशेष प्रार्थना की जाती है। अंजोरा गांव को सैनिकों का गांव भी कहा जाता है, क्योंकि यहां के लगभग 200 से अधिक जवान वर्तमान में भारतीय सेना एवं विभिन्न सुरक्षा बलों में रहकर देश सेवा कर रहे हैं। ऐसे में पुरुषोत्तम माह के दौरान ग्रामीण भगवान भोलेनाथ से देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे वीर जवानों की सुरक्षा, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और उनके परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

ग्रामीण आशीष मिश्रा ने बताया कि यह अनुष्ठान उनके पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि गांव के बुजुर्गों द्वारा प्रारंभ की गई यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। पुरुषोत्तम माह में ग्रामीण जन सामूहिक रूप से पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं और गांव, समाज तथा राष्ट्र के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।

अंजोरा गांव का यह अनूठा आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्रप्रेम का जीवंत उदाहरण है। जहां एक ओर शिवभक्ति की अविरल धारा प्रवाहित होती है, वहीं दूसरी ओर देश की सेवा में समर्पित सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना भी दिखाई देती है। यही कारण है कि एक सदी से अधिक पुरानी यह परंपरा आज भी ग्रामीणों की अटूट आस्था का केंद्र बनी हुई है और आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ने का कार्य कर रही है।

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Author: aajtak24x7

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