कान्हा टाइगर रिजर्व में उपचाराधीन बाघ की दुखद मृत्यु*

*नीतू पटेल जबलपुर

कान्हा टाइगर रिजर्व में उपचाराधीन बाघ की दुखद मृत्यु

*___फोटो-05___*

*मण्डला।* कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में लंबे समय से उपचाररत एक बाघ की आज मृत्यु हो गई। यह सूचना वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्मियों के लिए अत्यंत दुखद है।

वन विभाग के अनुसार, उक्त बाघ को 4 जून 2026 को हाथी गश्ती के दौरान बीट किसली, कक्ष क्रमांक 777 (स्थान संदूक खोल) के निकट बेहद अस्वस्थ अवस्था में पाया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों के त्वरित निर्देश पर बाघ का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे गहन इलाज के लिए मुक्की क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया गया था।

प्रारंभिक जांच में बाघ में *केनाइन डिस्टेम्पर* रोग के लक्षण पाए गए थे। इसके बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (SWFH), जबलपुर तथा वाइल्डलाइफ कंजरवेशन ट्रस्ट (WCT) के विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों के संयुक्त दल ने बाघ का निरंतर निरीक्षण और गहन उपचार किया। देश के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सकों और प्रतिष्ठित संस्थानों से भी विशेष तकनीकी सलाह ली गई, लेकिन सभी प्रयासों के बावजूद बाघ को बचाया नहीं जा सका।

*शव परीक्षण और अंतिम संस्कार* राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्धारित प्रोटोकॉल और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), भोपाल के निर्देशों के अनुसार शव परीक्षण किया गया। डॉ. संदीप अग्रवाल (वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी), डॉ. आशीष वैद्य (पशुचिकित्सक, बैहर) तथा डॉ. अनुष्का उपाध्याय (पशु चिकित्सक, SWFH जबलपुर) की टीम ने पोस्टमॉर्टम किया।

परीक्षण में बाघ के सभी महत्वपूर्ण अंग स्वस्थ पाए गए। मृत्यु के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा (Visceral Organs) के नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए संग्रहित किए गए हैं।

शव परीक्षण पूरा होने के बाद, नामित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की उपस्थिति में बाघ के पार्थिव शरीर का पूर्ण भस्मीकरण कर दिया गया।

*उपस्थित प्रमुख अधिकारी एवं व्यक्ति* इस संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान रवींद्र मणि त्रिपाठी (क्षेत्र संचालक, कान्हा टाइगर रिजर्व), जमुना प्रसाद भगत (तहसीलदार, बैहर), अजिनक्या देशमुख (फील्ड बायोलॉजिस्ट), चंद्रेश खरे (मानसेवी वन्यजीव अभिरक्षक), परशुराम चौहान (NTCA प्रतिनिधि), शकुंतला मरकाम (सरपंच, बम्हनी), मुक्की परिक्षेत्र अधिकारी तथा कान्हा टाइगर रिजर्व के अन्य फील्ड स्टाफ उपस्थित रहे।

कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि बाघ की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन प्रकृति के नियम के आगे सभी प्रयास विफल रहे।

aajtak24x7
Author: aajtak24x7

100% LikesVS
0% Dislikes