14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया
1947 का विभाजन सिर्फ़ सरहदों का बँटवारा नहीं था…
वो घरों, परिवारों, रिश्तों और सदियों पुरानी जड़ों का बँटवारा था।
एक पंजाबी होने के नाते, जब मैं उस दौर को याद करता हूँ तो उस दर्द का एहसास होता है, जिसे हमारे बुज़ुर्ग अपने सीने में समेटकर सब कुछ पीछे छोड़ आए। अपनी नई ज़िंदगी शुरू करने के लिए उन्होंने अपने देश, अपनी मिट्टी, अपने वतन—भारत को चुना। 🇮🇳
किसी ने अपना घर छोड़ा, किसी ने ज़मीन-जायदाद, तो किसी ने अपने परिवार के सदस्य खोए। लाखों लोगों के पास अंत में केवल जान, यादें और फिर से खड़े होने का हौसला बचा था।
आज की पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि हमें मिला आज का भारत असंख्य लोगों के विस्थापन, संघर्ष और बलिदान की स्मृतियों को भी अपने भीतर समेटे हुए है।
यह किसी दूसरे समुदाय के प्रति नफ़रत का दिन नहीं है।
यह उन सभी निर्दोष लोगों को याद करने का दिन है, जिन्होंने विभाजन की कीमत चुकाई।
हम पंजाबियों ने दर्द देखा, उजड़ना देखा और फिर शून्य से खड़े होकर अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बनाना भी सीखा।
हमारी पीढ़ियाँ आगे बढ़ गईं, लेकिन इतिहास में हमारे बुज़ुर्गों के पैरों के वे छाले आज भी बाकी हैं, जिनके सहारे वे अपना सब कुछ छोड़कर भारत की ओर चले थे।
विभाजन के हर पीड़ित और हर उस परिवार को नमन, जिसने उस त्रासदी का दर्द सहा। 🙏
उनका दर्द याद रहे, उनका संघर्ष याद रहे, उनका बलिदान याद रहे—ताकि आने वाली पीढ़ियाँ जान सकें कि आज जो हमारे पास है, उसकी कीमत किसी ने बहुत पहले अपने आँसुओं और अपनों को खोकर चुकाई थी। 🇮🇳
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