चैनल आज तक 24×7 कटनी संवाददाता मुकेश कुमार यादव की रिपोर्ट
शराबबंदी की मांग को लेकर महिलाओं का विरोध प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम पर सौंपा ज्ञापनकटनी
/ढीमरखेड़ा। जिले में शराब की बिक्री और सेवन को लेकर महिलाओं में बढ़ते आक्रोश के बीच शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए शराबबंदी की मांग उठाई। महिलाओं ने उमरिया पान क्षेत्र के महेंद्र कॉलोनी में एकत्र होकर शराब के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। इसके बाद महिलाओं ने थाना उमरिया पान में थाना प्रभारी तथा नायब तहसीलदार उमरिया पान के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर जिले में पैकारी शराब को बंद कराने की मांग की।
महिलाओं का कहना है कि शराब के कारण कई परिवारों में लगातार विवाद और आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं। शराब की लत का प्रभाव केवल शराब पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि शराब के कारण घरेलू कलह, मारपीट, आर्थिक तंगी और सामाजिक समस्याओं की स्थिति कई परिवारों में देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि मेहनत-मजदूरी से परिवार चलाने वाले लोगों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा नशे में खर्च हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतें प्रभावित होती हैं।
ज्ञापन में महिलाओं ने प्रशासन और सरकार से शराब जैसे नशीले पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की। महिलाओं ने विशेष रूप से पैकारी शराब को बंद किए जाने की बात कही। उनका कहना है कि यदि शराब की उपलब्धता कम होगी तो लोगों को नशे से दूर रखने में मदद मिलेगी और परिवारों में होने वाले विवादों पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कहा कि शराब की समस्या का सबसे अधिक असर परिवार की महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। शराब के नशे में होने वाले विवादों के कारण महिलाओं को मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार घरेलू हिंसा जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो जाती हैं। महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि इस समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं, बल्कि सामाजिक समस्या के रूप में भी गंभीरता से लिया जाए।
महिलाओं ने यह भी कहा कि शराब की लत से युवा वर्ग और नाबालिग बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। उनका मानना है कि नशे के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए प्रशासन को शराब की अवैध बिक्री और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए। साथ ही गांव और कस्बों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने पहुंची महिलाओं ने प्रशासन से उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और शराब की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करेंगी।
महिलाओं का कहना है कि शराबबंदी की मांग किसी एक परिवार की समस्या नहीं, बल्कि समाज के हित से जुड़ा विषय है। उनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाना और परिवारों में शांति एवं खुशहाली कायम करना है। अब देखना होगा कि महिलाओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बाद प्रशासन और शासन स्तर पर इस दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।



