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सरौधा उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के सरकारी रिकॉर्ड पर बड़ा सवाल! निजी अस्पताल और होम डिलीवरी के मामले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने का आरोप, प्रमाण सामने आने का दावा।  

सरौधा उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के सरकारी रिकॉर्ड पर बड़ा सवाल! निजी अस्पताल और होम डिलीवरी के मामले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने का आरोप, प्रमाण सामने आने का दावा।

*आशुतोष चतुर्वेदी की रिपोर्ट सिगंरौली* सरौधा। देवसर के सरौधा उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सीएचओ झुका मेड़ा की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निजी अस्पतालों में हुई डिलीवरी और घर पर हुए प्रसव के मामलों को कथित रूप से सरौधा उप स्वास्थ्य केंद्र में हुई डिलीवरी दर्शाकर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

मामले को लेकर शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके पास इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण और रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनके आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज प्रसव और वास्तविक प्रसव स्थल के बीच अंतर की बात सामने आ रही है।

निजी अस्पताल में डिलीवरी, सरकारी रिकॉर्ड में सरौधा केंद्र?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी महिला की डिलीवरी निजी अस्पताल में अथवा घर पर हुई है, तो सरकारी रिकॉर्ड में उसे सरौधा उप स्वास्थ्य केंद्र में हुई डिलीवरी के रूप में कैसे दर्ज किया गया?

क्या संबंधित महिलाओं के नाम, प्रसव की तारीख और प्रसव स्थल का सत्यापन किया गया?

क्या इन महिलाओं से विभागीय स्तर पर जानकारी ली गई?

और यदि रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज हुई है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

पैसे के लेन-देन के आरोप भी गंभीर

मामले में पैसे लेकर कथित रूप से सरकारी रिकॉर्ड में नाम जोड़ने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। यदि उपलब्ध प्रमाणों की जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक कर्मचारी की कार्यप्रणाली का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा।

*आशुतोष चतुर्वेदी की रिपोर्ट सिगंरौली* SDM से लेकर CMHO-BMO तक सवाल

बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी एसडीएम देवसर सहित स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट कार्रवाई या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

अब सवाल यह है कि—

क्या संबंधित अधिकारियों ने रिकॉर्ड का सत्यापन कराया है?

क्या लाभार्थी महिलाओं से वास्तविक प्रसव स्थल की पुष्टि की गई?

क्या निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड से सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कराया गया?

और अगर आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई कब होगी?

किसके संरक्षण में चल रहा पूरा खेल?

यदि उपलब्ध प्रमाण जांच में सही साबित होते हैं तो यह भी जांच का विषय होगा कि एक सीएचओ द्वारा इस प्रकार की कथित एंट्री लंबे समय तक किसके संरक्षण या मिलीभगत से की जाती रही।

वहीं यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित सीएचओ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सामने आकर दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर हैं। क्या प्रमाणों के आधार पर निष्पक्ष जांच होगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा?

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Author: aajtak24x7

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