प्रेस नोट
*विजयादशमी पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने निभाई पारंपरिक पूजा-अर्चना की परंपरा, पूर्वजों को किया नमन
ग्वालियर, 20 अक्टूबर 2026।
विजयादशमी के पावन अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार की पारंपरिक धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। इस दौरान उनके पुत्र महाआर्यमन सिंधिया भी साथ रहे। दोनों पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए।
विजयादशमी के अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया सबसे पहले ग्वालियर स्थित अपने पैतृक गोरखी मंदिर के देवघर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कुलदेवताओं का आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात वे मांढरे वाली माता मंदिर पहुंचे और माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सिंधिया परिवार की दशहरा परंपरा में मांढरे वाली माता के दर्शन और शमी पूजन का विशेष महत्व रहा है।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया छतरी पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इन धार्मिक आयोजनों के माध्यम से उन्होंने परिवार की ऐतिहासिक विरासत और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। सिंधिया राजपरिवार में विजयादशमी पर पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना और शस्त्र पूजन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह परंपरा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, धर्म के प्रति आस्था तथा शक्ति, साहस और कर्तव्य के प्रतीकों से जुड़ी मानी जाती है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने सभी देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्व के अवसर पर सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। ग्वालियर में सिंधिया परिवार की पारंपरिक पूजा-अर्चना ने इस अवसर पर ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक आस्था और पारिवारिक परंपराओं की निरंतरता को रेखांकित किया।



