

मुकेश शुक्ला आज तक 24 * 7 तीर्थ नगरी ओमकारेश्वर में भले ही प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का आवागमन हो रहा है और उन्हें अनेक समस्याओं से प्रतिदिन झु जना भी पड़ता है मगर यातायात की व्यवस्थाओं की ओर प्रशासन गंभीरता पूर्वक ध्यान ही नहीं दे रहा है तो वहीं तीर्थ नगरी के पुराने बस स्टेशन से लेकर जेपी चौक तक का आम मार्ग अधिकांश समय वीरान एवं सुनसान सा दिखलाई पड़ता है यहां के व्यापारी भी हाथों पर हाथ धर कर बैठे रहते हैं यात्रियों का यहां से आवागमन नहीं होने के कारण उनके धंधे भी चौपट हो रहे हैं तो वही प्रशासन के द्वारा नए बस स्टेशन से सीधे झूला पुल तक यात्रियों को वाहनों के माध्यम से भिजवाने से यहां पर ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है व्यापारियों का कहना है कि
क्या इस बाजार के लोगो को अपनी रोजी रोटी कमाने का हक नही है
क्या यही व्यवस्था का सही प्रबंधन है ?
मन्दिर में जन सैलाब है और मेन बाजार खाली है
मेन मार्किट वाले दुकानदार अपनी आर्थिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं को दोषी मान रहे हैं
फारेस्ट तिराहा और पुराने बस स्टैंड को बंद कर के
सारे श्रद्धालु को एक ही रास्ते से मन्दिर भेजना और भीड़ बड़ाना क्या बेहतर लोकव्यवस्था का प्रमाण है
और यदि हे तो फिर भीड़ की स्थिति में कोई दुर्घटना होती हैं तो उसका जिम्मेदार कोन रहेगा ? यह सर्वत्र चर्चा का विषय बना रहता है. मुकेश शुक्ला आज तक 24 * 7



