Skip to main content

Aaj Tak24x7

नृत्य वास्तव में विज्ञान है जो अध्यात्म की ओर ले जाता हैः डॉ पद्मश्री नलिनी।


तृष्णा कलाकार को अग्रेसित करती हैः डॉ पद्मश्री कमलिनी।
ग्वालियर में संगीत का माहौल तैयार करेगा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालयः प्रो: स्मिता सहस्त्रबुद्धे
*ग्वालियर* । सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगनाएं पद्मश्री डॉक्टर नलिनी एवं पद्मश्री डॉक्टर कमलिनी ने नृत्य को विज्ञान बताया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी नृत्य को मनोरंजन का साधन समझती है। यह हमारा दायित्व है कि इस अवधारणा को दुरुस्त किया जाए। नई पीढ़ी को यह बताना आवश्यक है कि संगीत की तीनों विधाओं मसलन, सुर, लय व ताल का सीधा अध्यात्म से सम्बन्ध है। दो पद्मश्री नलिनी और डॉक्टर पद्मश्री कमलिनी शनिवार को पडाव स्थित आइकॉम सेंटर पर उदभव संस्था द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में गणमान्य जनों व संगीत प्रेमियों को सम्बोधित कर रहीं थीं। ग्वालियर में इस वर्ष तानसेन समारोह का सौवां वर्ष है। ऐसे में कला जगत की इन नामचीन हस्तियों को सुनने शहर के संगीत-कला प्रेमी शिरकत करने आये थे। उन्होंने बताया कि ग्वालियर में कत्थक नृत्य की सशक्त परम्परा रही है। ग्वालियर घराने के आलावा जयपुर घराने सहित कई घरानों को जोड़ने का कार्य राजमाता सिंधिया जी ने किया है। डॉ नलिनी ने ग्वालियर पर गर्व किया कि उनका यहां लम्बे समय से जुड़ाव रहा है। डॉ कमलिनी ने कहा कि ग्वालियर में भारतनाट्यम की परम्परा देखी। यहां कला व संस्कृति न केवल सहेजा गया बल्कि पल्लवित व पुष्पित भी किया गया है। प्राचीन काल से हमारी इस विरासत को हमारे पूर्वजों ने खूब सहेज के रखा। अब हमारी बारी है कि हम इसे और दिव्यता व भव्यता के साथ आगे बढ़ाएं। डर लगता है कि कहीं पाश्चात्य की आंधी में यह विरासत खो न जाए। डॉ पद्मश्री कमलिनी मौजूदा परिवेश में नृत्य के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से चर्चा की। कला के क्षेत्र में शून्य से शिखर तक की यात्रा के अनुभव परोसते हुए डॉ कमलिनी ने कहा कि हमें तो कत्थक का अ, ब, स, द भी नहीं आता था। लेकिन गुरु कृपा से ही संभव हुआ कि हम दोनों शीर्ष पर हैं। हमारे अंदर कला की तृष्णा थी। जिसने हमें कलाकार बनाया। कलाकार का सौभाग्य भी यही होता है कि वह दर्शकों से तालियां बटोर ले जाए।
नृत्य विज्ञान है।
डॉ पद्मश्री कमलिनी ने नृत्य के क्षेत्र में अपने शोध कार्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया की नई पीढ़ी के समक्ष जब हम नृत्य को विज्ञान बताते हैं तो उन्हें भरोसा नहीं होता लेकिन जब तथ्यों के साथ प्रमाणिकता प्रस्तुत की जाती है समझ में आता है कि कुछ तो है। नृत्य के समय मुद्रा संचालन, थेरेपी एवं नृत्य में योग की ध्यान मुद्राओं का समावेश होने से एक विशेष तरह का नाद उत्पन्न होता है। यह समझने की ही नहीं अपितु अनुभूति का भी विषय है।
इस अवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रोफेसर स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि ग्वालियर कला एवं संस्कृति को सहेजने वाली नगरी कहा जाता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मैं व्यक्तिगत तौर पर प्रयास करूंगी कि संगीत प्रेमियों के लिए एक संगीतमय माहौल तैयार किया जाए। इसके लिए संगीतप्रेमियों के मार्गदर्शन और सुझावों की दरकार रहेगी। हमारी सभ्यता व संस्कृति को हमें मिलकर बचाना है।
इससे पहले उद्भव संस्था के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजसेवी डॉ केशव पाण्डेय जी ने आगंतुकों का परिचय कराया एवं कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से बातचीत की। डॉ. पांडेय ने कहा कि कला जगत की यह महान हस्तियां अपने शहर में आई हैं। स्कूल के प्रतिनिधियों व बच्चों को इनके अनुभवों से प्रेरणा लेनी चाहिए। आज इन्होंने अगर सफलता के चरमोत्कर्ष पर अपने पैर जमाए हैं तो इसके पीछे उनकी अनवरत साधना कठिन तपस्या है। कला एवं संगीत के क्षेत्र में उद्भव द्वारा देश-विदेश में किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा करते हुए डॉ ़ पांडेय ने कहा कि बॉलीवुड की आंधी में हमारी विरासत चली न जाए इसके लिए कड़े प्रयास करने होंगे। कार्यक्रम का संचालन उद्धव संस्था के सचिव दीपक तोमर ने किया जबकि सुरेन्द्र पाल कुशवाह द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर डॉक्टर बी डी माणिक, डाक्टर मानव महंत, मोनिका श्रीवास्तव, होजाई गम्बा सिहं, जगदीश गुप्ता महामना, वरिष्ट पत्रकार डॉ सुरेश सम्राट, वरिष्ठ समाज सेवी महेश मुदगल, प्रसिद्ध मूर्तिकार अनूप शिवहरे, वरिष्ठ गीतकार राजेश शर्मा, घनश्याम भारती सहित बड़ी संख्या में शहर के गणमान्यजन व संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

aajtak24x7
Author: aajtak24x7