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गीता जयंती दिवस 11 दिसंबर को संपूर्ण विश्व भर में मनाया जाएगा

मुकेश. शुक्ला आज तक 24 * 7** भारत देश ही नहीं विश्व के लगभग 175 देश में ज्ञान के सागर के रूप में पढ़े जाने वाली पवित्र ग्रंथ गीता जयंती का पर्व 11 दिसंबर को मनाया जा रहा है

सनातन धर्म संस्कृति में “श्री गीता जयंती” का बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन श्रीमद्भगवद्गीता के जन्म का प्रतीक है, जो सनातन धर्म संस्कृति के पवित्र ग्रंथों में से एक है। पंचांग के अनुसार, गीता जयंती मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह 11 दिसंबर 2024, बुधवार को मनाई जाएगी//

श्रीमद्भगवत गीता विशेष पक्ष-:

  • भगवदगीता सनातन धर्म के पवित्र ग्रन्थों में से एक हैं जिसे मनुष्य के जीवन का सार माना जाता हैं आज से लभगभ 5,000 वर्ष पहले भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था जिसे भगवदगीता के नाम से जाना जाता हैं और इसे श्रीमद्भगवद्गीता व गीतोपनिषद् भी कहा जाता है।
  • अक़्सर मन में यह सवाल आता है कि ज़िन्दगी क्या हैं और हमारे जीवन का उद्देश्य क्या हैं या फ़िर मौत के बाद क्या होता है आदि तो आपको श्रीमद्भागवत गीता को पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें जीवन के सभी सवालों के जवाब दिये गए है।
  • सही मायने में यह नर और नारायण का वार्तालाप है, भगवान ने अर्जुन को माध्यम बनाकर संसार के प्रत्येक मनुष्य को उपदेश किया है।
  • भगवदगीता में जीवन का अनमोल ज्ञान दिया गया है इसलिए इसे वैज्ञानिक, मनस्विद, राजनीतिज्ञ, संन्यासी, दार्शनिक, शिक्षक या विद्यार्थी कोई भी हो सभी को जीवन मे भगवदगीता को ज़रूर पढ़ना चाहिए जिसे आप अपने जीवन को औऱ बेहतर बना सकते हैं क्योंकि यह जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन करती है।
  • जब इंसान अर्जुन की तरह कुरुक्षेत्र रुपी जीवन में अवसाद व परेशानियों से घिर जाता है, जब इंसान को विपरीत परिस्थितियों में चारों तरफ घनघोर अंधकार दिखता है, तो फिर ऐसी परिस्थिति में यह ग्रंथ आपके अंदर नव ऊर्जा का संचार, सामर्थ्य, शक्ति, नवचेतना, नई दिशाएं, प्रकाश और ज्ञान प्रदान करता है।
  • कुरूक्षेत्र में गीता का उपदेश न केवल अर्जुन को ही मिला बल्कि यह 3 औऱ लोगों ने सीधें भगवान श्री कृष्ण से ग्रहण किया। पहले संजय जिनको दिव्य दृष्टि दी गईं थी ताकि वह कुरुक्षेत्र युद्ध मे होने वाली सभी घटनाओं को राजा धतराष्ट्र को बता सकें। दूसरे हनुमानजी जोकि अर्जुन के रथ पर विराजमान थे औऱ तीसरे बर्बरीक जोकि घटोत्कच का पुत्र था वह यह सब एक पहाड़ी के ऊपर से देख रहा था इस प्रकार लगभग 5,000 वर्षों पहले भगवदगीता का उपदेश दिया गया था।
  • भगवदगीता को समस्त ग्रन्थों में सवश्रेष्ठ माना गया है, भगवदगीता में 18 अध्याय दिये गए हैं जिसमे आपको कुल 700 छंद मिलते हैं, श्रीमद्भागवत गीता को मूलतः संस्कृत भाषा मे लिखा गया है जिसे 175 भाषाओं में अनुवादित किया जा चुका है ????️
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Author: aajtak24x7