मुकेश शुक्ला आज तक 24 * 7 खंडवा / ओंकारेश्वर नया वर्ष 2025 का प्रथम सनातनी त्यौहार मकर संक्रांति का पlवन दिवस इस मर्तबा 28 वर्ष बाद विशेष दुर्लभ संयुक्त सयोग में आ रहा है 14 जनवरी को ज्योतिषाचार्य के मत अनुसार दोपहर 3:17 बजे स्नान दान पुण्य का विशेष महत्व बतलाया गया है मकर संक्रांति पर्व पर जब शनि और शुक्र एक ही राशि में स्थित होते हैं तो यह महायोग सत्ता पक्ष को स्थिरता प्रदान करता है और देश में संविधान को मजबूती प्रदान करता है शनि और शुक्र को एक ही राशि में होने से आर्थिक संपन्नता के संकेत बनते हैं इस वर्ष व्यापार और कृषि क्षेत्र में उन्नति की प्रबल संभावनाओं के साथ ही स्वर्ण व अन्य धातु के बाजार में बढ़ोतरी के संकेत बदलते हैं जिससे निवेशकों को भारी लाभ भी हो सकता है दुर्गा ज्योतिष कार्यालय बड़वाह के ज्योतिषाचार्य विद्वान पंडित पंकज शर्मा के अनुसार इस बार मकर संक्रांति व्याघ्र वहां पर सवार होकर आई है जिसका उप वाहन अश्व है 28 वर्षों बाद बाद यह संयोग तपस्वियो ऋषि मुनियों के लिए विशेष रूप से वरदान साबित होगा मतलब यह हुआ कि साहस शक्ति और आत्मनिर्भरता का उदय होगा जबकि वहां अश्व गति और ऊर्जा को प्रदान करता है। ज्योतिषाचार्य श्री शर्मा के अनुसार मकर संक्रांति पर पीला वस्त्र धारण करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है वहीं स्नान के दौरान कुमकुम का लेप लगाकर स्नान करने से सुख शांति समृद्धि और वैभव का संकेत देता है पश्चिम दिशा में दृष्टि होने के कारण सनातन धर्म और परंपराओं को ताकत मिलेगी मकर संक्रांति के इस रूप से पीतल सोना एवं अन्य धातुओं की कीमतें भी बढ़ सकती है। *पुष्य नक्षत्र में विशेष योग और स्नान का महत्व मकर संक्रांति पर पुष्य नक्षत्र और और स्वग्रही योग का विशेष महत्व बन रहा है जो अत्यंत ही शुभकारी माना जाता है इस दिन दान पुण्य पूजा पाठ करने से 10 गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश के साथ ही हिंदू धर्म में शुभ कार्य करने के लिए भी यह श्रेष्ठ माना जाता है नर्मदा गंगा जैसी पुण्य करी नदियों में स्नान दान और भगवान सूर्य की उपासना का यह विशेष दिवस माना जाता है इस दिन तीन गुण और अन्य का दान करने से बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है मान्यताओं के अनुरूप इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सारे पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है ज्योतिषाचार्य श्री शर्मा के अनुसार यह अत्यंत दुर्लभ योग मकर संक्रांति एवं महाकुंभ का प्रथम स्नान का दुर्लभ योग है जो 28 वर्षों के बाद बन रहा है



