वर्षो बाद भी नहीं पहुंची नहरों से खेतों में पानी अन्नदाता मायूस

आज तक 24×7 न्यूज, सोनभद्र से विनोद कुमार की रिपोर्ट
दुद्धी सोनभद्र। उत्तर प्रदेश का ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाली महत्वपूर्ण कनहर सिंचाई परियोजना अमवार बांध का निर्माण ” कनहर बनाओ हरियाली लाओ ” के तत्कालीन नारों के बीच दर्जनों गांव के आदिवासी गिरिवासियों के विस्थापित होने के बावजूद भी बंजर ऊसर जमीन पर अभी तक नहरों का निर्माण अधूरा होने के कारण खेतों में सिंचाई की आँस अन्नदाता किसान की वर्षो से अधूरी हैं। जबकि कनहर परियोजना का निर्माण का उद्देश्य ही खेतों में सिंचाई कर हरियाली लाने और अन्नदाता किसान के जीवन स्तर में परिवर्तन खुशहाली लाने के लिए की गई हैं । परंतु अरबो रुपए खर्च करने के बाद भी क्षेत्र में खुशहाली की जगह मायूसी छाई हुई है। नहरों से खेतों में पानी नहीं पहुंचने के कारण लाखो हेक्टेयर भूमि बंजर वीरान पड़ी हैं। विस्थापितों का ना कुआ, ना तालाब, ना हीं बाग बगीचे व मवेशी बीना सब जैसे तैसे मकान का निर्माण हुआ हैं। 150 वर्ग फीट प्रति विस्थापित जमीन पूर्ण रूप से जमीं पर नहीं उत्तर सका। प्रति विस्थापित 7 लाख 11 हजार रूपये तीन पीढ़ी का मुवावजा सरकार ने दिया जिसमें अभी तक कई विसंगतियां विस्थापन पैकेज को मूर्त रूप नहीं दें सकी। आखिर उत्तर प्रदेश कनहर सिंचाई परियोजना डूब क्षेत्र 11 गांव अमवार, भिसूर, सुंदरी ,कोर्ची, लांबी , सुगवामान, गोहड़ा , बघाड़ु ( आंशिक ) रंदह, कुदरी बरखोहरा जबकि छत्तीसगढ़ डूब क्षेत्र के 6 गांव त्रिशूल्ली ,धवली, झारा, सेमरवा , कामेश्वर नगर, कुशफर जबकि झारखंड राज्य डूब क्षेत्र 5 गांव भूमफोर, सेमरवा, फेपशा ,शुरू, परासपानी हैं। कनहर बांध नहर दाये लम्बाई 120 किलोमीटर जिसका निर्माण महज 20% अब तक हुआ । जबकि बाये लम्बाई 125 किलोमीटर हैं जिसका निर्माण 15% लगभग पूरा ही हो सका है। नहर की चौड़ाई नीचे तल से 2 मीटर जबकि नहर के ऊपरी तल की चौड़ाई 5 मीटर हैं। आखिर कब कनहर सिंचाई परियोजना अमवार का कुल 22 गांवो का विस्थापन से उत्पन्न होने वाली खेतों में सिंचाई से हरियाली आयेगी? अब भी अन्नदाता किसान की बंजर ऊसर जमीने चीख चीखकर पूछ रही है।



