
ग्वालियर दिनांक 07 जनवरी 2025 – स्मार्ट सिटी परियोजना का प्रभार संभालते ही ग्वालियर नगर निगम आयुक्त श्री अमन वैष्णव ने विकास और जनकल्याण की नई गाथा लिखने की शुरुआत कर दी है। हाल ही में, आईएसबीटी क्षेत्र में जलभराव की पुरानी समस्या के समाधान हेतु नगर निगम आयुक्त श्री वैष्णव ने तत्परता और दूरदर्शिता के साथ महत्वपूर्ण कदम उठाए।
आईएसबीटी क्षेत्र का निरीक्षण करते समय निगमायुक्त श्री वैष्णव ने पाया कि इस क्षेत्र में लंबे समय से जलभराव और गंदगी की समस्या बनी हुई थी। यह समस्या न केवल रेलवे ट्रैक और आईएसबीटी जैसी महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों के लिए जोखिमपूर्ण थी, बल्कि आसपास के किसानों की खेती को भी नुकसान पहुंचा रही थी।
तत्काल निर्देश और तीव्र कार्यवाही
नगर निगम आयुक्त
श्री वैष्णव ने कार्यपालन यंत्री श्री संजीव गुप्ता और सीवर सेल नोडल अधिकारी श्री लल्लन सिंह सेंगर को तुरंत इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने के निर्देश दिए। उनकी कुशल नेतृत्व क्षमता और तार्किक सोच के तहत टीम ने महज तीन दिनों के भीतर समस्या का समाधान कर दिया।
टीम ने 1800 एमएम की बंद पड़ी लाइन को खोजा, जो कई वर्षों से निष्क्रिय थी। इस लाइन को सफाई और मरम्मत के बाद पुनः चालू किया गया। इस परियोजना के तहत रेडीमेड गारमेंट पार्क, आईएसबीटी, और स्मार्ट सिटी बस स्टैंड से 20 एमएलडी जलालपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक जल निकासी प्रणाली को जोड़ा गया। इस पूरे कार्य के लिए जहां लगभग 10 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आंका गया था, वहीं नगर निगम की टीम ने सीमित संसाधनों और मात्र 8-10 कर्मचारियों के साथ इसे सफलतापूर्वक पूरा किया।
नगर निगम आयुक्त की प्रशंसा
नगर निगम आयुक्त ने कार्यपालन यंत्री संजीव गुप्ता और नोडल अधिकारी लल्लन सिंह सेंगर की पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, सीवर सेल की टीम ने जिस तत्परता और समर्पण से यह कार्य किया है, वह अन्य विभागों के लिए प्रेरणा है।ष्
जनता को संदेश
नगर निगम आयुक्त ने शहरवासियों को आश्वस्त किया कि ग्वालियर स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के सभी प्रमुख मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। नगर निगम अपने संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग कर जनता की सेवा में जुटा है।
उत्कृष्ट कार्य की मिसाल
ग्वालियर नगर निगम के इस ऐतिहासिक कार्य ने यह साबित कर दिया है कि जब प्रशासनिक दूरदर्शिता और तकनीकी क्षमता का सही उपयोग होता है, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
शहर को दी बड़ी राहत
शासकीय संपत्ति का संरक्षण: रेलवे और आईएसबीटी क्षेत्र जलभराव से पूरी तरह सुरक्षित हुए।
किसानों को राहत: जलभराव की समस्या से किसानों को निजात मिली, जिससे उनकी खेती सुरक्षित हुई।
स्मार्ट सिटी के लक्ष्य की ओर कदम: यह कार्य शहर को स्वच्छ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
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