आध्यात्मिकता सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार है- विभिन्न वक्ताओं ने रखे अपने विचार

आरोग्य भारती ग्वालियर नगर एवं लश्कर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आज दैनिक सांध्य समाचार पड़ाव ग्वालियर के सेमिनार हाल में "आध्यात्म और स्वास्थ्य" विषय पर महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी का आयोजन डॉ एस पी बत्रा, प्रान्त संरक्षक आरोग्य भारती के मार्गदर्शन में एम. के. सारस्वत अध्यक्ष ग्वालियर नगर, डॉ अरबिंद मित्तल उपाध्यक्ष ग्वालियर ,डॉ.जे. डी. सुखानी संरक्षक आरोग्य भारती ग्वालियर नगर एवं डॉ आमोद गुप्ता,सचिव तथा लश्कर इकाई के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्यों के साथ द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ दिव्या दीक्षित उपाध्यक्ष आरोग्य भारती ग्वालियर नगर ने किया।

कार्यक्रम का प्रारम्भ भगवान धन्वंतरि के चित्र पर पुष्पांजलि और स्वस्ति वाचन से हुआ। संगोष्ठी में विभिन्न चिकित्सकों ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘आध्यात्म और स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। आध्यात्मिकता मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। सिर्फ शरीर में बीमारी मात्र न होना ही स्वस्थ शरीर की पहचान नहीं! क्यों कि आज प्रत्येक इंसान काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, वैरभाव, घृणा, नफरत, तिरस्कार की भावना, चिंता, भय आदि अनेक मनोदैहिक बीमारियों से पीड़ित है। इसलिए जब ब्यक्ति आध्यात्मिक रीति से स्वस्थ बनेगा तब ही सर्वांगीण स्वास्थ्य प्राप्त होगा। उक्त विचार विभिन्न विद्वान चिकित्सकों,अध्यात्म वेत्तावों ने ब्यक्त किये।
सेमिनार में अपने विचार ब्यक्त करने वालों में डॉ दिव्या दीक्षित, डॉ एस के बत्रा, श्री केशव पांडेय, डॉ. रोज़ा औलियाई डा.ब्रजेश सिंघल, डॉ एम एल लाहा, डॉ दिनेश मजूमदार, डॉ सुखानी, डॉ दिनेश खुडासिया, डॉ दुर्गेश पाठक, डॉ मनमोहन कौर, डॉ के एस मंगल, डॉ स्नेह लता दुबे, डॉ राहुल सप्रे, कुलदीप सिंह सेंगर,डॉ. अशोक, ब्रह्म कुमारी दीदी आदि अनेकों प्रबुद्धजन ने अपने प्रबोधन से लाभान्वित किया उपस्थित रहे।
विभिन्न वक्ताओं के विचारों का सारांश से सात बातें आध्यात्मिक स्वास्थ्य की कुंजी है- 1-आध्यात्मिक व्यक्ति को अपने और सर्वोच्च दिव्य शक्ति की दिव्यता का ज्ञान होता है, इससे वो आत्म आनंद का अनुभव करता है। 2-आध्यात्मिक स्वास्थ्य वाले व्यक्ति का मन शांत और शुद्ध, सकारात्मक, शक्तिशाली और स्वस्थ रहता है। जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों के बीच में भी वह स्वस्थ रहता है और प्रत्येक स्थिति में हमेशा खुश रहता है। स्वस्थ जीवन के लिए शान्ति और खुशी बहुत ही आवश्यक है। आध्यात्मिक व्यक्ति हमेशा सकारात्मक चिंतन ही करता है और सकारात्मक चिंतन सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। जीवन में पवित्रता, शान्ति, खुशी, ईश्वरीय प्रेम अनुभव करने के कारण ही व्यक्ति मानसिक तनाव से दूर रहता है और मनोदैहिक बीमारियों से तथा दुर्व्यसनों से दूर रहता है।
3-आध्यात्मिक रीति से स्वस्थ मानव का परमपिता परमात्मा तथा सारे विश्व की आत्माओं के प्रति विश्व बंधुत्व की भावना बनी रहती है।उसका मन निःस्वार्थ, दिव्य प्यार से भरपूर होता है।यह गुण सामाजिक स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है।
4-आध्यात्मिक रीति से स्वस्थ इंसान काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, भय, चिंता से मुक्त होने के कारण मन से स्वस्थ रहता है। ये विकार ही सारे विश्व की अनेक समस्याओं तथा अनेक बीमारियांं का कारण हैं। मानसिक स्वस्थता ही शारीरिक स्वस्थता का आधार है। क्रोध के कारण इंसान का रक्तचाप बढ़ जाता है जिससे ह्दय रोग भी बढ़ने लगता है। क्रोध के कारण हमारी रोग प्रतिकारक शक्ति कम होने लगती है जिससे मॉंसपेशियॉं सिकुड़ने के कारण दर्द होता है। यह सभी विकार जहर के समान हैं जो हमारे शारीरिक – मानसिक तथा सामाजिक स्वास्थ्य को बिगाड़ते हैं।
5-आध्यात्मिक रीति से स्वस्थ इंसान के जीवन में नम्रता, निर्भयता, मधुरता, धैर्य, हर्षितमुखता, सहनशीलता, आत्मविश्वास, सरलता, संतुष्टता आदि गुण होते हैं और ये सभी गुण सर्वांगीण स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक हैं।
6-आध्यात्मिक रीति से स्वस्थ इंसान अपने जीवन में सहनशक्ति, समाने की शक्ति, सामना करने की शक्ति, परखने की शक्ति, निर्णय शक्ति, सहयोग की शक्ति आदि अनेक आत्मिक शक्तियों का विकास करता है जिसके कारण कैसी भी विपरीत परिस्थितियों के बीच में भी बहुत ही स्वस्थ और शक्तिशाली रहता है। उसका मनोबल बहुत मजबूत रहता है।
7-आध्यात्मिक रीति से स्वस्थ व्यक्ति व्यसनों से मुक्त रहता है जिसके कारण व्यसनों से होने वाली अनेक बीमारियों से भी बच जाता है।आध्यात्मिक रीति से स्वस्थ इंसान जीवन में हमेशा श्रेष्ठ कर्म ही करता है। जिससे अनेक बीमारियों से बच जाता है।
संगोष्ठी के समापन पर श्री एम.के. सारस्वत अध्यक्ष ग्वालियर नगर ने सभी प्रतिष्ठित डॉक्टर्स, वक्ताओं और उपस्थिति माननीय श्रोताओं को उनके सहयोग के लिए ह्रदय से आभार देते हुए धन्यवाद दिया।
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Author: aajtak24x7

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