तीर्थ नगरी ओमकारेश्वर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निकला शताब्दी वर्ष पर पथ संचलन हुआ बैठक आयोजन आयोजन

मुकेश शुक्ला आज तक 24 * 7

ओंकारेश्वर तीर्थ धाम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने पर नगर पथ संचलन और सभा का आयोजन बड़े उमंग जोश उत्साह के साथ निकाला गया। ब्रह्मपुरी पार्किंग में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में षड़ दर्शन संत मंडल ओंकारेश्वर के अध्यक्ष महंत मंगलदास जी त्यागी, मुख्य वक्ता के रूप में विभाग प्रचारक विजेंद्र गोठी, ओंकारेश्वर नगर कार्यवाहक संतोष चौहान, संत समाज और आरएसएस के नगर कार्यकर्ता उपस्थित रहे । संघ की विचारधारा यात्रा पर प्रकाश डालते हुए मुख्य वक्ता ने बताया कि संघ सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामाजिक-संगठन काआंदोलन है, जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है और आम जनमानस को जोड़ रहा है। वक्ताओं ने बताया कि संघ की शुरुआत एक बौद्धिक पहल के रूप में हुई थी । शाखाओं के अलग-अलग साधन संसाधन होते हैं अर्थात् शाखाएँ विभिन्न रूपों में काम करती हैं — विद्या, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा आदि के माध्यम से।संघ के इतिहास के कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव.
संघ इतिहास की जानकारी देते हुए मुख्य वक्ता ने बताया कि 1950 में विद्यार्थी परिषद की स्थापना हुई, 1952 में विद्या भारती की स्थापना हुई — दोनों ही आज पूरे देश में “सरस्वती शिशु मंदिर” नाम से अनेक शिक्षा संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं।

संघ ने समाज के विभिन्न वर्गों — जैसे विद्यार्थी, डॉक्टर, वकील, उद्योगपति, कर्मचारी और आम जनता — को जोड़ने का प्रयास किया है।

वर्ष1975 के समय जब संघ को दबाने के कई प्रयास हुए, तब भी संघ की कार्यशालाएँ — समाज को जाग्रत करती हैं

2007 में अमरनाथ साइन बोर्ड की जमीन को लेकर 40 दिन तक संघर्ष किया गया।

2008 में राम सेतु का अध्ययन कराने के लिए विशेष यंत्र (machine / उपकरण) लगवाई गई।

2011 में सांप्रदायिक हिंसा अधिनियम लागू किया गया।

2012 में स्वामी विवेकानंद के नाम पर पूरे भारत में कार्यशालाओं का आयोजन हुआ, जिनका लक्ष्य परिवारों को एकत्र करना और विचार साझा करना था।

कार्यक्रम में एक प्रेरक प्रसंग का जिक्र किया गया, जब एक बार रतन टाटा संघ के सरसंघचालक से मिले और पूछा: “आप कौन सी फैक्ट्री चलाते हैं?” इन प्रश्न पर सरसंघचालक ने उत्तर दिया कि हमारी “फैक्ट्री” वह नहीं है — बल्कि प्रतिदिन एक घंटे भगवा ध्वज के सामने कार्यशाला आयोजित होती है, जिसमें विभिन्‍न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है। यह कार्यशाला ही हमारी जीवनदृष्टि, संस्कार, नीति और दिशा तय करती है।

नगर में घोष के साथ पथ संचलन निकाला..
सभा के पश्चात नगर में घोष के साथ कदमताल करते हुए 400 स्वयंसेवकों ने संघ की गणवेश मैं संचलन निकाला । नगर में जगह-जगह पुष्प बरसा कर स्वागत किया गय । ब्रह्मपुरी पार्किंग ,ममलेश्वर मार्ग, बालवाड़ी पुराना बस स्टैंड, मुख्य मार्ग ,जेपी चौक, पुराना झूला पुल, शिवपुरी, ओंकारेश्वर मदिर, नया झूला पुल होते हुए वापस बह्मपुरी पार्किंग पर समापन हुआ।

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Author: aajtak24x7

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