न्यूज़ रिपोर्टर मोहित संघी
आरटीओ कार्यालय में अवैध वसूली और दलाली का खेल? शिकायत पत्र से मचा हड़कंप
विशेष समुदाय के नाम पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, जांच की मांग तेज
जबलपुर। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) जबलपुर एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। जिला सह संयोजक बजरंग दल एड. अमित कुमार जाट द्वारा डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को सौंपे गए शिकायत पत्र में आरटीओ कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और कथित दलालों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि लाइसेंस परमानेन्ट कराने के नाम पर खुलेआम अवैध वसूली, दलाली और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि ड्राइविंग लाइसेंस के स्थायीकरण (परमानेन्ट लाइसेंस) के लिए आने वाले आवेदकों को जानबूझकर टेस्ट में फेल कर दिया जाता है और बाद में दलालों के माध्यम से उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। आरोप है कि पैसे देने वालों को बिना किसी कठिनाई के पास करा दिया जाता है, जबकि रकम न देने वालों को बार-बार असफल घोषित किया जाता है।
शिकायत पत्र में कुछ कर्मचारियों और कथित एजेंटों के नामों का भी उल्लेख करते हुए कहा गया है कि आरटीओ कार्यालय के अंदर एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो आम नागरिकों को परेशान कर अवैध कमाई में लगा हुआ है। आरोप यह भी लगाया गया है कि कार्यालय में आने वाले लोगों से ₹1100 या उससे अधिक की अवैध राशि लेकर लाइसेंस पास कराने का दावा किया जाता है।
जनता के साथ धोखा या व्यवस्था पर सवाल?
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर सीधा हमला माना जाएगा। लाइसेंस जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में कथित रिश्वतखोरी सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
हालांकि शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है। लेकिन शिकायत के सार्वजनिक होने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि परिवहन विभाग और जिला प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।
कठोर सवाल
क्या आरटीओ कार्यालय में लाइसेंस प्रक्रिया दलालों के कब्जे में है?
क्या आम नागरिकों को जानबूझकर परेशान कर वसूली की जा रही है?
क्या भ्रष्टाचार की शिकायतों पर विभाग कार्रवाई करेगा या मामला फाइलों में दब जाएगा?
फिलहाल शिकायत ने जबलपुर के आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और जनता निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है।



