*ओंकारबाग मोरटक्का में कलशाभिषेक के साथ 55 स्वर साधकों का सम्मान
मिश्रीलाल कोहरे
ओंकारेश्वर /मोरटक्का
श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, ओंकारबाग मोरटक्का के वार्षिक उत्सव में कलशाभिषेक, विद्वत सम्मान, स्वर साधना सम्मान एवं तपस्वी सम्मान समारोह श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। संपूर्ण निमाड़ के सैकड़ों समाजजन शामिल हुए। विश्वशांति एवं विश्वकल्याण की भावना से शांति धारा की गई, जुलूस के बाद 108 दीपकों से महाआरती एवं भक्ति संध्या हुई।
*प्रशासनिक अधिकारियों का गौरव सम्मान*
रायबहादुर सेठ ओंकारजी कस्तूरचंदजी धार्मिक एवं पारमार्थिक संस्था की ओर से खंडवा एसपी अगम जैन, जिला न्यायाधीश दीपक चौधरी मंडलेश्वर, सेवानिवृत्त डीएसपी डीके माला जैन इंदौर, वन परिक्षेत्राधिकारी सुश्री सृष्टि जैन सनावद, एलआईसी मैनेजर दीपक गोधा बड़वाह एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव सुश्री प्रीति जैन बड़वाह का सम्मान किया गया।
एसपी अगम जैन ने कहा कि जैन धर्म में मान-सम्मान की अपेक्षा का त्याग है, लेकिन किसी का सम्मान दूसरों के लिए प्रेरणा बने तो स्वीकार है। उन्होंने निमाड़ को संस्कृति का समृद्ध क्षेत्र बताया। कार्यक्रम समन्वयक राजेंद्र जैन महावीर ने कहा कि युवा आईपीएस अगम जैन कर्तव्यनिष्ठा के साथ जैन धर्म के नियमों जैसे रात्रि भोजन त्याग का पालन करते हैं और ‘पुलिस की पाठशाला’ से युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।
*55 स्वर साधकों को विशेष उपाधियां*
बड़वाह के 14, महेश्वर के 5, मंडलेश्वर के 5, खंडवा के 12 और सनावद के 17 सहित 55 स्वर साधक-साधिकाओं एवं वाद्य कलाकारों का सम्मान हुआ। सनावद के प्रदीप पंचोलिया को 50 वर्षों की भजन सेवा के लिए ‘स्वर सम्राट’, संगीता महेंद्र पाटोदी को ‘कोकिलकंठी स्वर सम्राज्ञी’, पंकज जटाले, खंडवा के कांतीलाल जैन एवं बड़वाह के अशोक जैन को ‘स्वर सम्राट’ की उपाधि दी गई। जटाले ऑर्केस्ट्रा का भी विशेष सम्मान हुआ। राजेश राकेश रौनक काला परिवार ने रजत शांति धारा संस्था को भेंट की।
विद्वत सम्मान में इंजीनियर पं. दिनेश जैन, कमलेश शास्त्री, दिल्ली के शुभम शास्त्री, सांगानेर के ओजस जैन एवं वैभव जैन सम्मानित हुए। पर्यूषण पर्व पर उपवास करने वाले तपस्वियों एवं 10 वर्ष से कम आयु में निर्जल उपवास करने वाले बच्चों का भी सम्मान किया गया। संत सिंगाजी गौशाला मोगावां के लिए आचार्य वर्धमान सागरजी का चित्र सरपंच ईश्वर बिरला को भेंट किया गया। मोटिवेशनल स्पीकर आलोक सेठी ने समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया।
*सवा सौ वर्ष पुरानी विरासत*
ओंकारबाग धर्मशाला की स्थापना 125 वर्ष पूर्व रायबहादुर सेठ ओंकारजी कस्तूरचंदजी ने तीर्थयात्रियों के लिए कराई थी। तब ओंकारेश्वर रोड स्टेशन पर उतरने वाले यात्री यहां ठहरकर सिद्धवरकूट जाते थे। भगवान आदिनाथ मंदिर भी करीब 125 वर्ष पुराना है। दशलक्षण के बाद पूर्णिमा पर कलशाभिषेक की परंपरा आज भी कासलीवाल परिवार द्वारा निभाई जा रही है। काला परिवार की तीन पीढ़ियों ने सेवा दी है।
संस्था अध्यक्ष अमित कासलीवाल ने स्वागत भाषण दिया, मंगलाचरण संगीता पाटोदी, स्वागत गीत प्रदीप पंचोलिया, संचालन राजेंद्र जैन महावीर एवं आभार संस्था मंत्री आशीष चौधरी ने व्यक्त किया। मंदिर के प्राचीन स्वरूप को कायम रखते हुए जीर्णोद्धार जारी है।



