मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज का धूमधाम से मनाया गया 43 वा दीक्षा दिवस


छत्री नाका चौराहा पर हुआ महाआरती का आयोजन,उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
जहां भी मुनि श्री पहुंचते हैं, वह धरती धार्मिक आनंद से सरोबोर हो जाती है – नपा अध्यक्ष मनमोहन साहू

सिरोंज। मुनिश्री 108 पुगंव सुधा सागर महाराज का 43वा दीक्षा दिवस गुरू भक्तों द्वारा बडें ही धूमधाम से मनाया गया। शहर में पहली बार जैन समाज का कोई कार्यक्रम सार्वजनिक स्थान व शहर के मुख्य चौराहा छत्री नाका पर आयोजित किया गया। इस महाआरती कार्यक्रम में जैन समाज के श्रद्धालुओं अलावा पुरूष,महिला वर्ग,युवा वर्ग ने पूरी मस्ती के साथ नृत्य किया। इस मौके पर श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण भी किया गया। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष मनमोहन साहू,सासंद प्रतिनिधि मान सिंह रघुवंशी,सकल जैन समाज सहित बडी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहें।

व्यक्ति के जीवन मूल्यो में आता है सकारात्मक परिवर्तन – इस अवसर पर नपा अध्यक्ष मनमोहन साहू ने कहा कि जहां भी मुनि श्री पहुंचते हैं, वह धरती धार्मिक आनंद से सरोबोर हो जाती है। वे जिस भी स्थान गए वहां मंदिर निर्माण कराया। मंदिर निर्माण का कार्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मंदिर के माध्यम से व्यक्ति के जीवन मूल्यों में सकारात्मक परिवर्तन आता है, वह सत्य के मार्ग को चुनता है। उसके विचारों में संयम आता है और वह आध्यात्मिक विकास की ओर बढ़ता है। वही उन्होने आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज को नमोस्तु करते हुए कहा कि विद्यासागर जी के संदेशों और सिद्धांतों से आध्यात्मिक, धार्मिक, सामाजिक जागृति के साथ ही देश के बड़े-छोटे लघु उद्योगों को बढ़ावा मिला है। उन्हीं के शिष्य मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने तप, तपस्या और कठिन परिश्रम से समाज में एक नई चेतना का प्रवाह किया है। उनके द्वारा सामाजिक सरोकार के लिए किये जा रहे कार्य अंधकार में एक ज्योति के समान हैं।

मुनि श्री कर चुके हजारो किलो मीटर की पैदल यात्रा – वही सांसद प्रतिनिधि मान सिंह रघुवंशी ने कहा कि मुनि श्री के मार्गदर्शन में अनेक जगह गोशाला, विद्यालय, अस्पताल, लघु उद्योगों की स्थापना जैसे पुण्यार्थ के कार्य किए गए हैं, जिससे अनेक व्यक्तियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुनिश्री के सानिध्य में ही कोटा में बालिका छात्रावास, चिकित्सालय और गोशाला का निर्माण कराया गया है। वहां अध्यनरत छात्रों के जीवन में संस्कारों की नींव पड़ी, सात्विक विचार शामिल हुए। ऐसी पीढ़ी को तैयार करने का श्रेय मुनिश्री को जाता है। उन्होंने कहा कि मुनिश्री अपने जीवन में हजारों किलो मीटर की पैदल यात्रा कर चुके हैं। ऐसी तपस्या और परिश्रम करने वाले मुनिश्री का सानिध्य आप सभी को मिला यह आप सभी के लिए परम सौभाग्य की बात है। वही उन्होने कहा कि देश और दुनिया में भगवान महावीर स्वामी के विचार आज और भी प्रासंगिक हो गए हैं। जैन धर्म जिस शांति, संभाव और अहिंसा का मार्ग बतलाता है। आज उसे दुनिया ने भी स्वीकारा है। महावीर स्वामी के विचारों को मुनि श्री सुधा सागर जी द्वारा आगे बढ़ाया गया है।

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Author: aajtak24x7

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